Friday, 18 November 2016

ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें


गायक तलत अज़ीज़ 
गीतकार शहरयार 
संगीतकार खैय्याम 

ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें
ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमें

सुर्ख फूलों से महक उठती हैं दिल की राहें
दिन ढले यूँ तेरी आवाज़ बुलाती है हमें
ज़िन्दगी जब भी तेरी...

याद तेरी कभी दस्तक, कभी सरगोशी से
रात के पिछले पहर रोज़ जगाती है हमें
ज़िन्दगी जब भी तेरी...

हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यूँ है
अब तो हर वक़्त यही बात सताती है हमें
ज़िन्दगी जब भी तेरी...

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