जब भी मिलती है मुझे अजनबी लगती क्यूँ है ज़िंदगी रोज़ नये रंग बदलती क्यूँ है तुम से बिछड़े हैं तो अब किस से मिलाती है हमें ज़िंदगी देखिये क्या रंग दिखाती है हमें
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